Toolkit Yojana: अगर आप अपने हाथों से कोई पारंपरिक काम करते हैं और उसी हुनर से परिवार चलाते हैं, तो सरकार की एक योजना आपके लिए काफी काम की साबित हो सकती है। इसमें सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि काम को आधुनिक बनाने के लिए टूलकिट, ट्रेनिंग और कारोबार बढ़ाने के लिए लोन जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।
खास बात यह है कि इस योजना का फायदा केवल किसी एक तरह के काम करने वाले लोगों को नहीं मिलता। बढ़ई, लोहार, दर्जी, कुम्हार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, मोची और ऐसे ही कुल 18 पारंपरिक कामों से जुड़े कारीगर इसके दायरे में आते हैं।
योजना के तहत पात्र कारीगरों को ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता मिल सकती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड और कारोबार के लिए ₹3 लाख तक का बिना जमानत ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है।
आखिर यह योजना कौन-सी है, किन लोगों को इसका लाभ मिलेगा और आवेदन कहां से करना होगा? आइए पूरी जानकारी आसान भाषा में समझते हैं।
Toolkit Yojana: आखिर कौन-सी है यह योजना?
जिस योजना की बात हो रही है, उसका नाम पीएम विश्वकर्मा योजना है। इसे 17 सितंबर 2023 को पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को एक साथ कई तरह की सहायता देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका कुल परिव्यय वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक ₹13,000 करोड़ रखा गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ना है।
सितंबर 2026 में PM Vishwakarma Yojana के तीन साल पूरे होने के आसपास सरकार के अनुसार 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल हो चुका है।
पीएम विश्वकर्मा योजना: किस-किस काम से जुड़े लोगों को मिलेगा फायदा?
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कुल 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं।
इनमें शामिल हैं:
- बढ़ई
- नाव बनाने वाले
- कवच/हथियार बनाने वाले
- लोहार
- हथौड़ा और टूल किट बनाने वाले
- ताला बनाने वाले
- सुनार
- कुम्हार
- मूर्तिकार और पत्थर तराशने वाले
- मोची/जूता बनाने वाले
- राजमिस्त्री
- टोकरी, चटाई, झाड़ू और कॉयर से जुड़े कारीगर
- पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाले
- नाई
- माला बनाने वाले
- धोबी
- दर्जी
- मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले
यानी योजना का दायरा काफी बड़ा है और इसमें गांवों के साथ-साथ शहरों में काम करने वाले पात्र पारंपरिक कारीगर भी शामिल हैं।
PM Vishwakarma Yojana: ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता
कारीगरों के लिए सबसे उपयोगी सुविधाओं में से एक टूलकिट इंसेंटिव है।
पात्र लाभार्थियों को आधुनिक औजार खरीदने के लिए ₹15,000 तक का टूलकिट इंसेंटिव ई-वाउचर के रूप में दिया जाता है। इसका उद्देश्य कारीगरों को बेहतर और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना है, जिससे काम की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ सके।
उदाहरण के लिए, अगर कोई दर्जी सिलाई का काम करता है या बढ़ई लकड़ी का काम करता है, तो आधुनिक औजार उसके काम को ज्यादा तेज और बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
PM Vishwakarma Yojana Benefits In Hindi: ट्रेनिंग के दौरान हर दिन ₹500
सिर्फ औजार देना ही PM Vishwakarma Yojana का उद्देश्य नहीं है। कारीगरों को आधुनिक तरीके से काम करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।
योजना में बेसिक ट्रेनिंग 5 से 7 दिन की होती है, जबकि एडवांस ट्रेनिंग 15 दिन या उससे अधिक की हो सकती है। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
ट्रेनिंग में आधुनिक टूल्स, बेहतर काम करने के तरीके, डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है।
PM Vishwakarma Yojana Benefits: अब सबसे बड़ी बात—₹3 लाख तक का लोन
कारीगरों के लिए योजना का एक बड़ा फायदा कारोबार बढ़ाने के लिए मिलने वाला क्रेडिट सपोर्ट है।
इसके तहत पात्र लाभार्थियों को ₹3 लाख तक का बिना जमानत Enterprise Development Loan दो चरणों में मिल सकता है।
पहली किस्त में ₹1 लाख तक
बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने वाले पात्र लाभार्थी को पहली किस्त में ₹1 लाख तक का लोन मिल सकता है।
इसकी अवधि 18 महीने तक रखी गई है।
दूसरी किस्त में ₹2 लाख तक
पहली किस्त का लोन ठीक तरीके से चुकाने और निर्धारित शर्तें पूरी करने के बाद दूसरी किस्त में ₹2 लाख तक का अतिरिक्त लोन मिल सकता है।
दूसरी किस्त के लिए डिजिटल लेनदेन अपनाना या एडवांस ट्रेनिंग पूरी करना जैसी शर्तें लागू हैं। इसकी अवधि 30 महीने तक है।
इस तरह दोनों चरणों को मिलाकर पात्र लाभार्थी को ₹3 लाख तक का क्रेडिट सपोर्ट मिल सकता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में लोन पर ब्याज कितना लगेगा?
PM Vishwakarma Yojana के तहत लोन पर कारीगरों के लिए 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर तय की गई है। सरकार की ओर से ब्याज में 8 प्रतिशत तक की सब्सिडी/इंटरेस्ट सबवेंशन का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को महंगे अनौपचारिक कर्ज पर निर्भर होने के बजाय औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है।
हालांकि वास्तविक लोन स्वीकृति बैंकिंग प्रक्रिया, पात्रता और योजना की शर्तों के अनुसार होगी।
क्या पीएम विश्वकर्मा योजना में डिजिटल पेमेंट करने पर भी मिलेगा फायदा?
आज के समय में कारोबार के लिए डिजिटल पेमेंट काफी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को बढ़ावा देने के लिए योजना में डिजिटल ट्रांजैक्शन इंसेंटिव का भी प्रावधान है।
पात्र लाभार्थी को बैंक खाते में होने वाले प्रत्येक पात्र डिजिटल लेनदेन पर ₹1 का प्रोत्साहन मिल सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 100 लेनदेन प्रति माह तक है।
इसका फायदा यह है कि कारीगर धीरे-धीरे UPI और डिजिटल भुगतान को अपने रोजमर्रा के कारोबार में शामिल कर सकते हैं।
PM Vishwakarma Yojana Details: सिर्फ लोन नहीं, सामान बेचने में भी मदद
कई छोटे कारीगरों की एक बड़ी समस्या यह होती है कि वे अच्छा सामान तो बना लेते हैं, लेकिन उसे बड़े बाजार तक पहुंचाना मुश्किल होता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में इस समस्या पर भी ध्यान दिया गया है। लाभार्थियों को मार्केटिंग सपोर्ट, ब्रांडिंग, क्वालिटी सर्टिफिकेशन, प्रदर्शनियों और ट्रेड फेयर के जरिए बाजार तक पहुंच बनाने में मदद दी जाती है।
इसके अलावा पात्र कारीगरों को GeM और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
कौन ले सकता है पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ?
हर व्यक्ति इस योजना के लिए पात्र नहीं है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं।
सामान्य तौर पर आवेदक:
- कम से कम 18 साल का होना चाहिए।
- 18 अधिसूचित पारंपरिक ट्रेड में से किसी एक में काम करता होना चाहिए।
- अपने हाथों और औजारों से काम करने वाला कारीगर/शिल्पकार होना चाहिए।
- असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर काम करता होना चाहिए।
- परिवार का केवल एक सदस्य योजना का लाभ ले सकता है।
- आवेदक या उसके परिवार के सदस्य का सरकारी नौकरी में होना पात्रता को प्रभावित करता है।
- पिछले 5 साल में स्वरोजगार/व्यवसाय के लिए समान सरकारी क्रेडिट आधारित योजना का लोन लेने से संबंधित शर्तें लागू होती हैं।
MUDRA या PM SVANidhi जैसी योजनाओं का लोन पूरी तरह चुका चुके लाभार्थियों के लिए भी मौजूदा नियमों के तहत PM Vishwakarma में पात्रता का प्रावधान है।
परिवार में कितने लोग पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं?
यह बात आवेदन करने से पहले जरूर समझ लें।
पीएम विश्वकर्मा के तहत एक परिवार से केवल एक सदस्य को लाभ मिल सकता है। योजना में परिवार की परिभाषा पति, पत्नी और अविवाहित बच्चों के रूप में दी गई है।
इसलिए पति और पत्नी दोनों अलग-अलग आवेदन करके एक ही परिवार के लिए योजना का लाभ लेने की कोशिश नहीं कर सकते।
PM Vishwakarma Yojana के लिए आवेदन कहां से होगा?
पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC के माध्यम से किया जाता है।
पंजीकरण के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया होती है। इसके बाद आवेदन की अलग-अलग स्तरों पर जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार प्रक्रिया में ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर सत्यापन, जिला स्तर पर जांच/सिफारिश और फिर स्क्रीनिंग कमेटी से अनुमोदन शामिल है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन के लिए क्या चाहिए?
आवेदन के दौरान आधार आधारित पहचान और बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। इसके अलावा आवेदक की व्यक्तिगत और व्यवसाय से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है।
क्योंकि दस्तावेज और प्रक्रिया मामले के अनुसार बदल सकती है, इसलिए आवेदन से पहले नजदीकी CSC पर वर्तमान आवश्यकताओं की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
2026 में प्रधान मंत्री विश्वकर्मा योजना की स्थिति क्या है?
सितंबर 2026 तक योजना ने बड़ा विस्तार देखा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 सितंबर 2026 तक 24.37 लाख से ज्यादा कारीगर बेसिक स्किल ट्रेनिंग पूरी कर चुके थे और 18.16 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को टूलकिट मिल चुके थे। वहीं 6.19 लाख से ज्यादा लोन स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि करीब ₹5,316 करोड़ बताई गई है।
सरकार के अनुसार 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य भी हासिल किया जा चुका है।
Conclusion: निष्कर्ष
अगर कोई व्यक्ति पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक हुनर से अपना काम करता है, तो पीएम विश्वकर्मा योजना उसके लिए सिर्फ लोन की सुविधा नहीं है। इसमें पहचान, ट्रेनिंग, ₹15,000 तक टूलकिट सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन, मार्केटिंग सपोर्ट और ₹3 लाख तक का बिना जमानत ऋण जैसी कई सुविधाओं को एक साथ जोड़ा गया है।
लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि योजना का लाभ केवल निर्धारित 18 ट्रेड में काम करने वाले और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कारीगरों को ही मिलेगा।
अगर आप बढ़ई, लोहार, दर्जी, राजमिस्त्री, कुम्हार, नाई, सुनार, मोची या योजना में शामिल किसी अन्य पारंपरिक काम से जुड़े हैं, तो नजदीकी CSC केंद्र पर अपनी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी जरूर जांचें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसे पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को पहचान, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, सस्ता संस्थागत ऋण, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार सहायता देने के लिए शुरू किया गया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में कितने रुपये का लोन मिलता है?
पात्र लाभार्थी को दो चरणों में ₹3 लाख तक का बिना जमानत ऋण मिल सकता है। पहली किस्त ₹1 लाख तक और दूसरी किस्त ₹2 लाख तक होती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में टूलकिट के लिए कितने रुपये मिलते हैं?
पात्र लाभार्थियों को आधुनिक टूल्स खरीदने के लिए ₹15,000 तक का टूलकिट इंसेंटिव दिया जाता है।
ट्रेनिंग के दौरान कितने रुपये मिलते हैं?
स्किल ट्रेनिंग के दौरान पात्र लाभार्थियों को ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में कितने ट्रेड शामिल हैं?
योजना में कुल 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं, जिनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, राजमिस्त्री, मोची आदि शामिल हैं।
क्या पीएम विश्वकर्मा योजना में बिना जमानत लोन मिलता है?
हां। योजना के तहत पात्र कारीगरों को बिना जमानत Enterprise Development Loan की सुविधा दी जाती है।
पीएम विश्वकर्मा लोन पर ब्याज कितना है?
योजना के तहत कारीगरों के लिए 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर लागू है और सरकार की ओर से निर्धारित सीमा तक ब्याज सबवेंशन दिया जाता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन कहां करें?
पंजीकरण CSC यानी Common Service Centre के माध्यम से किया जाता है। आवेदन और सत्यापन के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रक्रिया होती है।
क्या एक परिवार के दो लोग योजना का लाभ ले सकते हैं?
सामान्य नियम के अनुसार एक परिवार से एक सदस्य को ही योजना का लाभ दिया जाता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना कब शुरू हुई?
योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी और इसे वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक लागू करने के लिए ₹13,000 करोड़ का परिव्यय रखा गया है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सरकारी स्रोतों और उपलब्ध नवीनतम जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पात्रता, सत्यापन, ऋण स्वीकृति और अन्य लाभ योजना के मौजूदा नियमों तथा संबंधित अधिकारियों/बैंक की प्रक्रिया के अनुसार तय होते हैं। आवेदन करने से पहले आधिकारिक जानकारी या नजदीकी CSC से वर्तमान नियम जरूर जांचें।

गौरव जोशी सरकारी योजनाओं की सटीक और नवीनतम जानकारी प्रदान करने में माहिर हैं। वह बी. टेक. (I.T.) ग्रेजुएट हैं। इस समय वह Digital Fames के नाम से आई. टी. कंपनी और C.S.C. सेंटर (जन सेवा केंद्र) का संचालन कर रहे हैं। Yojana Story वेबसाइट के माध्यम से वह लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करते हैं।