इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना: अब 27 साल तक मिलेगा ₹1000, जानें किसे मिलेगा लाभ

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Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana 2026: किसी बच्चे की पढ़ाई सिर्फ इसलिए रुक जाए क्योंकि घर में कमाने वाला व्यक्ति नहीं है या परिवार आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है, यह स्थिति बेहद मुश्किल होती है। हिमाचल प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना ऐसे ही जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई को आर्थिक सहारा देने के लिए चलाई जा रही है।

अब इस योजना को लेकर एक और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सरकार ने 19 से 27 वर्ष की उम्र वाले पात्र युवाओं को भी हर महीने ₹1,000 की पॉकेट मनी देने का निर्णय लिया है। पहले ₹1,000 मासिक सहायता का प्रावधान 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए था।

योजना के तहत उच्च शिक्षा लेने वाले पात्र विद्यार्थियों को भी सहायता दी जाती है, जिससे आर्थिक कठिनाई उनकी पढ़ाई के रास्ते में बाधा न बने।

Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana: क्या है इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना?

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना हिमाचल प्रदेश सरकार की सामाजिक कल्याण योजना है, जिसे दिसंबर 2024 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत छोटे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। वहीं उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पात्र युवाओं के लिए भी अलग सहायता का प्रावधान है।

इसका मूल उद्देश्य यही है कि परिवार की आर्थिक स्थिति किसी बच्चे को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न करे।

अब 27 साल तक मिलेगा ₹1,000 का मासिक सहारा

योजना में सबसे बड़ा ताजा बदलाव 19 से 27 वर्ष की आयु वाले लाभार्थियों को लेकर है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि योजना के तहत आने वाले 19 से 27 वर्ष के पात्र बच्चों/युवाओं को भी ₹1,000 प्रति माह पॉकेट मनी दी जाए।

इससे उन युवाओं को उच्च शिक्षा के दौरान अपने छोटे-मोटे व्यक्तिगत खर्चों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिल सकता है।

पहले किस उम्र तक मिलती थी सहायता?

इस बदलाव से पहले योजना के तहत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की उम्र तक ₹1,000 प्रतिमाह की सहायता दी जा रही थी।

यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी जरूरतों में इस्तेमाल करने के लिए दी जाती है। अब सरकार ने 19 से 27 वर्ष की आयु वाले पात्र लाभार्थियों को भी मासिक सहायता के दायरे में लाने का फैसला किया है।

यानी योजना को सिर्फ स्कूली शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उच्च शिक्षा की अवधि में भी आर्थिक सहारा देने की दिशा में विस्तार किया गया है।

18 से 27 साल के युवाओं को उच्च शिक्षा में भी मदद

योजना के तहत पात्र युवाओं को उच्च शिक्षा जारी रखने में भी सहायता मिल सकती है।

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राज्य की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार 18 से 27 वर्ष की आयु के पात्र विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में डिग्री, डिप्लोमा या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए शिक्षा और हॉस्टल से जुड़ी सुविधाएं दी जाती हैं। यदि हॉस्टल उपलब्ध नहीं है तो पात्र विद्यार्थियों को पीजी आवास के लिए ₹3,000 प्रति माह तक सहायता का प्रावधान बताया गया है।

यह सुविधा उन विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है।

मंडी के सुंदरनगर में 435 बच्चों को मिली मदद

इस योजना का असर मंडी जिले के सुंदरनगर में भी दिखाई दे रहा है।

वित्त वर्ष 2026-27 में सुंदरनगर क्षेत्र के 435 बच्चों के लिए ₹53.53 लाख की सहायता स्वीकृत की गई है। इनमें 402 बच्चों को ₹1,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिल रही है, जबकि 33 लाभार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जा रही है।

यह सहायता ऐसे परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रही है जहां बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण है।

एकल मां के लिए बनी बच्चों की पढ़ाई का सहारा

सुंदरनगर के अंबेडकर वार्ड की भावना देवी का उदाहरण भी इस योजना से जुड़ा है। वह एकल मां हैं और अपने दो बच्चों की पढ़ाई तथा पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

उन्हें वर्ष 2024 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से योजना की जानकारी मिली थी। आवेदन करने के बाद उन्हें अपने दोनों बच्चों के लिए ₹1,000-₹1,000 प्रतिमाह की सहायता मिलने लगी।

ऐसी नियमित आर्थिक मदद परिवारों को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में सहारा दे सकती है।

Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana में किन परिवारों के बच्चे पात्र हैं?

योजना मुख्य रूप से ऐसे कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए है जिन्हें आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा जारी रखने में कठिनाई हो सकती है।

उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार पात्र श्रेणियों में विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चे शामिल हैं। योजना में परिवार की आय से संबंधित शर्त भी है। आधिकारिक योजना विवरण में वार्षिक पारिवारिक आय ₹1 लाख से कम होने की पात्रता बताई गई है।

हालांकि अलग-अलग लाभ के लिए उम्र और अन्य शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग से वर्तमान नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सहायता दी जा रही है।

वर्तमान जानकारी के अनुसार 21,292 लाभार्थी योजना से जुड़े हैं और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹40.29 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

सरकार के अनुसार योजना के तहत विधवा और एकल महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च भी वहन किया जा रहा है।

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बाहर पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी मिलेगा फायदा

योजना को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है।

हिमाचल प्रदेश के 2026-27 बजट में बताया गया है कि योजना के पात्र लाभार्थियों के बच्चे यदि राज्य से बाहर IIT, NIT, IIM, AIIMS और NLUs जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में प्रवेश लेते हैं, तो सरकार पाठ्यक्रम शुल्क, हॉस्टल और मेस आदि के खर्च को वहन करेगी।

इससे पात्र विद्यार्थियों को अपने राज्य से बाहर जाकर उच्च शिक्षा लेने का अवसर मिल सकता है।

मेधावी बच्चों को विदेश एक्सपोजर विजिट पर भेजने की तैयारी

सरकार ने योजना के लाभार्थियों और ‘Children of the State’ श्रेणी के मेधावी विद्यार्थियों के लिए भी एक नई पहल की तैयारी की है।

मुख्यमंत्री ने दोनों श्रेणियों से 50-50 मेधावी विद्यार्थियों, यानी कुल 100 बच्चों को विदेश एक्सपोजर विजिट पर भेजने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को राज्य से बाहर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अनुभवों से परिचित कराना बताया गया है।

Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का लाभ लेने के लिए कहां संपर्क करें?

अगर आपका परिवार योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता है, तो आवेदन और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी योजना की शुरुआती जानकारी देने में मदद कर सकती हैं। सुंदरनगर की लाभार्थी को भी योजना के बारे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से जानकारी मिली थी।

आवेदन करते समय आय प्रमाण पत्र, हिमाचल का स्थायी निवास प्रमाण, बच्चे की आयु से संबंधित दस्तावेज और पात्र अभिभावक की स्थिति से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। दस्तावेजों की अंतिम सूची स्थानीय विभाग से जरूर जांच लें।

Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana पर सरकार का क्या उद्देश्य है?

योजना का व्यापक उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना है।

किसी बच्चे को सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़नी न पड़े कि परिवार उसके स्कूल, किताबों, पोषण या उच्च शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकता—योजना इसी तरह की आर्थिक बाधाओं को कम करने पर केंद्रित है।

उच्च शिक्षा के स्तर पर सहायता बढ़ने से विद्यार्थियों को आगे पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सकता है।

Conclusion: निष्कर्ष

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना 2026 हिमाचल प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा को सहारा देने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ताजा अपडेट के बाद अब 19 से 27 वर्ष की आयु वाले पात्र युवाओं को भी ₹1,000 मासिक पॉकेट मनी देने का प्रावधान किया जा रहा है।

इसके अलावा योजना के तहत छोटे बच्चों को 18 वर्ष तक आर्थिक सहायता, पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में सहयोग और राज्य से बाहर प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए फीस, हॉस्टल और मेस जैसे खर्चों को कवर करने का प्रावधान भी है।

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मंडी के सुंदरनगर में 2026-27 के दौरान 435 बच्चों के लिए ₹53.53 लाख की सहायता स्वीकृत होना बताता है कि योजना का लाभ जमीनी स्तर पर भी पहुंच रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना क्या है?

यह हिमाचल प्रदेश सरकार की सामाजिक कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के पात्र बच्चों को शिक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

इस योजना में हर महीने कितने रुपये मिलते हैं?

पात्र बच्चों को 18 वर्ष तक ₹1,000 प्रति माह की सहायता का प्रावधान है। नए अपडेट के अनुसार 19 से 27 वर्ष के पात्र लाभार्थियों को भी ₹1,000 मासिक पॉकेट मनी देने का निर्णय लिया गया है।

क्या 27 साल तक योजना का लाभ मिलेगा?

नए निर्णय के अनुसार 19 से 27 वर्ष की आयु के पात्र युवाओं को भी मासिक ₹1,000 पॉकेट मनी दी जाएगी। उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य लाभों की अपनी पात्रता शर्तें हैं।

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना में कौन पात्र है?

योजना में मुख्य रूप से विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शामिल किया गया है। परिवार की आय और बच्चे की उम्र सहित अन्य पात्रता शर्तें भी लागू होती हैं।

क्या उच्च शिक्षा के लिए भी सहायता मिलती है?

हां। पात्र विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में उच्च शिक्षा, हॉस्टल और अन्य निर्धारित खर्चों के लिए सहायता का प्रावधान है।

अगर हॉस्टल नहीं मिले तो क्या होगा?

योजना के विवरण के अनुसार पात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हॉस्टल उपलब्ध न होने पर ₹3,000 प्रति माह तक पीजी आवास सहायता मिल सकती है।

इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के लिए कहां आवेदन करें?

योजना से संबंधित आवेदन और पात्रता की जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। स्थानीय विभाग से वर्तमान आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजों की सूची की पुष्टि करना उचित रहेगा।

मंडी के सुंदरनगर में कितने बच्चों को योजना का लाभ मिला?

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सुंदरनगर क्षेत्र में 435 बच्चों के लिए ₹53.53 लाख की सहायता स्वीकृत की गई है। इनमें 402 बच्चों को ₹1,000 मासिक सहायता और 33 लाभार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जा रही है।

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